शिक्षित बेरोजगार
एक सपना कुछ कर जाने का जिसके पीछे भागता रहा लेकिन असफलता ही किस्मत में लिखा हो तो कोई क्या कर सकता। उड़ते हुए पंछी के पंख पर अधिक बोझ लाद दिया जाए तो पंख होकर भी उसे उड़ने का सौभाग्य प्राप्त नही होगा। एक बच्चा जब जन्म लेता है तो हंसता है , रोता है , खुद खेलता है और मां निहारती रहती है । कहा कोई उसे पिटता है या चुटकुला सुनाता है, कुछ तो बात होगा उसके पीछे। जीवन का सबसे अनमोल पल मै उसे ही मानता हू क्योंकि किसी से कोई मतलब नही होता खुद मे मगन और वो खुद को भी मालूम नही होता। जैस जैसे उम्र बढ़ती वैसे बोझ बढ़ता चला जाता है। ये अनमोल जिवन मे जैसे जैसे बढ़ते है वैसे मोह भी बढ़ता है और वैसे वैसे जिवन को कठिन और व्यस्त बना देती है । जब हम शिशु अवस्था मे होते है तो अपने जैसा सामने वाला का बराबरी मे गुजरता है और अपनो से गुजारिश रहती की मुझे भी उसके जैसे खिलौना और वस्तुएं दिलादो। तब हमे ये पता ही नहीं होता कि पिता के पास रोजगार है या बेरोजगार है। राह चलते अंगुली से इशारे किसी ओर जाता तो बताया जाता मत लो खराब है हम भी सोचता की खराब है तो और के पास क्यों है पर ये कहा पता था कि पिता बेरोजगार है, कुछ प...